कोटा अस्पताल हंगामा: सी-सेक्शन के बाद 5 माताओं की मौत, ओक्सीटोसिन घोटाला

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कोटा अस्पताल हंगामा: सी-सेक्शन के बाद 5 माताओं की मौत, ओक्सीटोसिन घोटाला

राजस्थान के कोटा में एक बार फिर से अस्पतालों पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार गंभीर मामला है प्रसूति देखभाल का। मई 2026 में शुरू हुआ यह विवाद अब तक 5 माताओं की जान ले चुका है और कई अन्य महिलाओं को मौत के मुंह से लड़ते हुए छोड़ गया है। परिवारों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा लापरवाही और जहरीली दवाओं का इस्तेमाल किया गया।

यह कोई पहली बार नहीं है जब कोटा के सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं। 2019-2020 में भी यहाँ शिशुओं की बड़ी संख्या में मृत्यु हुई थी, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी थी। लेकिन आज की स्थिति और भी भयावह है।

सी-सेक्शन के बाद क्या हुआ? विस्तृत तथ्य

7 मई 2026 को नवभारत टाइम्स ने रिपोर्ट दी थी कि कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो प्रसूतियों की मौत हो गई थी। दूसरी महिला की मौत सी-सेक्शन ऑपरेशन के बाद कلى (kidney) फेल होने से हुई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की गहराई बहुत अधिक है। एक फेसबुक वीडियो में दावा किया गया कि कोटा मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा विभाग की लापरवाही से कम से कम 8 महिलाओं के पेशाब बंद हो गए थे। इनमें से 2 की मौत हो चुकी थी और 6 अभी भी इलाज के दौरान मौत से जंग लड़ रही थीं।

11 मई 2026 तक, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मृतकों की संख्या बढ़कर 4 हो गई थी। परिजन शव स्वीकार करने से इनकार कर रहे थे और अपने नवजात शिशुओं के साथ अस्पताल में धरना दे रहे थे। यह दृश्य देखने वालों के लिए दिल तोड़ देने वाला था—माँ की मौत के बाद बेबस बच्चे और रोष में जले परिवार।

ओक्सीटोसिन घोटाला: दवा या जहर?

यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि 'सिस्टम की लापरवाही' है या 'दवा का जहर'? 9 जून 2026 को इंडिया टुडे की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। जांच एजेंसियों ने राजस्थान में नकली ओक्सीटोसिन इंजेक्शन के रैकेट को तोड़ा।

जांचकर्ताओं का कहना है कि उन सिरिंजों में जो गर्भवती महिलाओं को प्रसव दर्द कम करने और प्रसव प्रक्रिया को तेज करने के लिए दी जाती हैं, असल में दवा नहीं, बल्कि सादा पानी भरा हुआ था। ओक्सीटोसिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो प्रसव के दौरान उपयोग किया जाता है। यदि इसकी गुणवत्ता खराब हो या नकली हो, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि कلى की विफलता और रक्तस्राव का कारण बन सकता है।

UNI की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने बताया कि 4 मई से लेकर अगले डेढ़ महीने तक कोटा के सरकारी अस्पतालों में 5 प्रसूति माताओं की मृत्यु हुई है। जांच रिपोर्ट में मृत्यु का सीधा कारण 'इलाज में लापरवाही' बताया गया है।

कर्मचारियों का विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस हंगामे के बीच, अस्पताल के कर्मचारियों ने भी अपना विरोध जताया। 10 मई 2026 को, नए अस्पताल में संधीआधारित नर्सिंग स्टाफ ने 2 घंटे के लिए काम बहिष्कार किया। उनका मानना था कि उन्हें नौकरी जाने का खतरा है और वे अन्याय का सामना कर रहे हैं। हालांकि, परिजनों और जनता का गुस्सा अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार डॉक्टरों पर था।

विपक्षी पार्टियों ने इस मामले को राज्य सरकार की स्वास्थ्य नीति की विफलता के रूप में उठाया। वे कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, कुछ वीडियो में 'शारदा' नाम की महिला के मामले का जिक्र है, जिनके परिजनों ने शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया और पोस्टमार्टम नहीं होने की बात कही। वे 'दोषी डॉक्टरों' के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पिछले इतिहास: 2019-2020 का शिशु मृत्यु संकट

कोटा के सरकारी अस्पतालों का यह पहला बड़ा संकट नहीं है। जनवरी 2020 में, J.K. Lon Hospital (कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल) में एक महीने में 104 शिशुओं की मौत हुई थी। यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई थी।

National Human Rights Commission (NHRC) ने उस समय राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया था। आल जज़ीरा और NPR जैसे अंतर्राष्ट्रीय मीडिया हाउस ने भी इस घटना की कवरेज की थी। उस समय भी आरोप लगाया गया था कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और लापरवाही शिशुओं की मौत का कारण बनी। आज, ठीक एक ही अस्पताल परिसर में माताओं की मौत हो रही है, जो इसे और भी चिंताजनक बनाता है।

आगे क्या होगा?

मामला अभी भी सक्रिय है। जून 2026 तक भी प्रदर्शन जारी रहे। अब सवाल यह है कि क्या नकली दवाओं के रैकेट और अस्पताल की लापरवाही दोनों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी? राज्य सरकार को तुरंत पारदर्शी जांच कराने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की आवश्यकता है।

Frequently Asked Questions

कोटा अस्पताल में माताओं की मौत का मुख्य कारण क्या बताया गया है?

जांच रिपोर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य कारणों में चिकित्सा लापरवाही और नकली ओक्सीटोसिन इंजेक्शंस का उपयोग शामिल है। जांचकर्ताओं का दावा है कि कुछ इंजेक्शंस में दवा के बजाय पानी भरा हुआ था, जिससे कلى फेल होने सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुईं।

इस मामले में कुल कितनी महिलाओं की मौत हुई?

मई 2026 के शुरूआती रिपोर्ट्स में 2 मौतों का जिक्र था, जो बाद में बढ़कर 4 हो गई। UNI की रिपोर्ट के अनुसार, 4 मई से लेकर अगले डेढ़ महीने के दौरान कोटा के सरकारी अस्पतालों में कुल 5 प्रसूति माताओं की मृत्यु हुई। इसके अलावा, कई अन्य महिलाएं गंभीर अवस्था में हैं।

क्या कोटा के अस्पतालों में पहले भी ऐसे मामले हुए थे?

हां, 2019-2020 के दौरान कोटा के J.K. Lon Hospital में एक महीने में 104 शिशुओं की मौत हुई थी, जिस पर NHRC ने कार्रवाई की थी। यह इतिहास वर्तमान मामले को और भी गंभीर बनाता है क्योंकि यह दिखाता है कि प्रणालीगत कमजोरियां अभी भी मौजूद हैं।

परिवारों और कर्मचारियों ने क्या प्रतिक्रिया दी?

परिवारों ने शव स्वीकार करने से इनकार करते हुए अस्पताल में धरना दिया और नवजात शिशुओं के साथ प्रदर्शन किया। वहीं, अस्पताल के संधीआधारित नर्सिंग स्टाफ ने नौकरी सुरक्षा की मांग को लेकर 2 घंटे का काम बहिष्कार किया। विपक्षी नेताओं ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ओक्सीटोसिन घोटाले में क्या पाया गया?

जून 2026 में हुई जांच में राजस्थान में नकली ओक्सीटोसिन इंजेक्शन के रैकेट का पता चला। जांच एजेंसियों ने बताया कि कई वials (बोतलों) में दवा के बजाय सादा पानी भरा हुआ था, जिसका सीधा संबंध प्रसूति के बाद महिलाओं की मौत से जोड़ा जा रहा है।

Savio D'Souza

लेखक के बारे में Savio D'Souza

मैं एक पत्रकार हूँ और भारतीय दैनिक समाचारों पर लिखने का काम करता हूँ। मैं राजनीति, सामाजिक मुद्दे, और आर्थिक घटनाक्रम पर विशेष ध्यान देता हूँ। अपने लेखन के माध्यम से, मैं समाज में जागरूकता बढ़ाने और सूचनात्मक संवाद को प्रेरित करने का प्रयास करता हूँ।